कुछ लोग मैं मेरा मुझे इससे बाहर नहीं आ पाते हैं

कुछ लोग मैं मेरा मुझे इससे बाहर नहीं आ पाते हैं

कुछ लोग मैं मेरा मुझे इससे बाहर नहीं आ पाते हैं| अगर इनके मन में कभी दया और करुणा का भाव भी आया और किसी को कुछ देने की इच्छा भी हुई तो एक विचार जरूर आता है इसमें मैं मुझे मेरा इनमें से कुछ ना कुछ होता है| महात्मा गांधी जी को क्या पड़ी थी कि वह अपना जॉब छोड़ कर आंदोलन की लड़ाई में देश की आजादी में अपना जीवन लगा दे| महात्मा गांधी जी ही नहीं बल्कि देशभक्त और महान आत्माएं पूजनीय आत्माएं जिन्होंने अपना सब कुछ छोड़ कर केवल देश के लिए और देश के लोगों के लिए समर्पित कर दिया| महात्मा गांधी जी चाहते तो जब अफ्रीका में जॉब के लिए गए थे और उनके साथ रेलगाड़ी में हादसा हुआ भूल कर अपनी जॉब पर लग जाते हैं पर उनका मन अशांत था जब उन्होंने देखा भारतीयों के साथ में नाइंसाफी हो रही है पैसे से तो वकील थे अन्याय देख कैसे देख पाते| उन्हें उनका मकसद मिल गया| इसलिए उन्होंने निष्काम भाव से निस्वार्थ भाव से आजादी के संघर्ष में अपनी लड़ाई की शुरुआत की उन्होंने सभी यह नहीं सोचा था कि उन्हें महात्मा बनना है या पूजनीय बनना है उनका केवल एक ही लक्ष्य था कि भारतीयों के लिए भारत के लिए आजादी और न्याय| क्योंकि वह खुद वकील थे वह जानते थे कि अगर हम कानून का उल्लंघन करेंगे तो बात बिगड़ सकती है इसलिए शांति और अहिंसा का मार्ग अपनाया यह नीति सब को भा गई और उन्हें अपना नेता बनाने में और मानने में संकोच नहीं हुआ| जब हम किसी को अपना नेता बनाते हैं हमारा धर्म हो जाता है कि हम उस उनके साथ उस मार्ग पर चलें| उस समय सब ने यह निर्णय लिया कि हम लोग महात्मा गांधी जी के बताए हुए रास्ते पर चलेंगे| महात्मा गांधी जी का और अन्य सभी महान आत्माओं का देशभक्तों का बलिदान जो लोग समझ नहीं सकते हैं वह लोग मूर्खता वश उनके प्रति गालियों का व्यवहार करते हैं आज की तारीख में कौन है ऐसा जो बिना कोई स्वार्थ के बिना कोई इच्छा की सब कुछ अपना देश के लिए दांव पर लगा दे| आज हम चाहे कितना भी बोले फिर भी हमारे मन में एक बार मैं मेरा मुझे तो आ ही जाता है इसलिए आप थोड़ा गहराई में और हृदय से सोच कर देखिए कि जिन लोगों ने हमारे देश के लिए अपनी सारी जिंदगी दांव पर लगा दी क्या आज हम लोग उनके साथ न्याय कर रहे हैं? आजादी के पहले हम लोग का एक ही मकसद था अंग्रेजों से आजादी लेकिन जैसे ही देश आजाद हुआ हम लोग अपना रंग दिखाना चालू कर दिया जिसका बहुत ही गहरा असर महात्मा गांधी जी को हुआ, भारत और पाक का बंटवारा और फिर बाद में जाति भेद जो लोग कुछ साल पहले तक देश की आजादी के लिए लड़ रहे थे| वह कुछ सालों के बाद आपस में की लड़ने लगे| मैं मेरा मुझे इस पर मुझे कहानियां याद आती है| एक कहानि दो भाई की जो बचपन से तो साथ में रहे थे बचपन से साथ में रहे थे और लक्ष्य था कि हम बड़ा सा बड़ा उद्योग करें और जब उद्योग बड़ा हुआ तो एक नहीं रहे दो हो गए अलग-अलग, किसी एक घर की कहानी नहीं है हर घर की है हर उस घर की जान दो भाई अलग होते हैं होता है| भेज भी दो भाई हिंदू मुस्लिम में बट गया| उसके बाद चार चोरों की कहानि है जो एक बैंक लूटने का प्लान बनाते हैं और जब बैंक लूट कर सफलता मिलती है तो आपस में लड़ झगड़ कर अपने अपने हिस्से के लिए मारपीट करते हैं और अंत में कोई भी सुखी नहीं हो पाता है| कहने का अर्थ यह है कि हम मानव कहीं ना कहीं अपना जो मूल लक्ष्य होता है धीरे धीरे उसे भटक कर मैं मुझे और मेरा पर आ जाते हैं| महात्मा गांधी जी को इतना दुख हुआ जब उनको पता चला देश का बंटवारा चाहते हैं जो इंसान जिंदगी भर जिन के लिए लड़ा| जिनको हमने राष्ट्रपिता कहां कितना दुखी होगा वह कितना दुखी होगा वह पिता कितना दुखी होगा जब उसके दो बेटे अपना अपना हिस्सा मांगते हैं मैं मेरा मुझे करते हैं| इसलिए यह प्रथा तो कई सालों से चलते आ रही है फिर भी हम लोगों ने इससे सीखा नहीं है| महाभारत में भी मैं मेरा मुझे ही कारण था महाभारत हुई हालांकि पांडव अपना सब कुछ देने के लिए तैयार थे फिर भी उसके बावजूद मैं मेरा मुझे ने एक बड़ा युद्ध करा दिया| मेरी आप लोगों से प्रार्थना मेरी पार्टी मेरी संस्था मेरा प्रदेश मेरा समाज इन सबसे ऊपर उठिए हमारे जीवन में इतने सारे उदाहरण है उन से सीखिए कि जो साथ में रहने में खुशियां है प्यार है मोहब्बत है वह अलग करके नहीं है| आजादी के समय बटवारा हुआ सबको दुख हुआ महात्मा गांधी जी को दुख हुआ लेकिन आज आपके पास एक मौका है उनकी आत्मा को और सभी देशभक्तों जिन्होंने अपनी जान लगा दी उनकी आत्मा को एक खुशी और शांति दे और अपने आने वाली पीढ़ियों के सामने एक उदाहरण रखें कि हम लोग मैं मेरा और मुझे से ऊपर उठ कर जी सकते हैं| याद कीजिए उन देशभक्तों को उन देश के जवानों को उन पुलिस अफसरों को जिन्होंने मैं मेरा मुझे से ऊपर उठकर हमारे लिए कुर्बानी दी और दे रहे हैं आज भी| धन्यवाद जय हिंद जय भारत|

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